भाजपा सरकार के (2014-2020) कार्यकाल में भारत का डंका पूरे विश्व में बज रहा है लेकिन हकीकत इसके उलट है ।

  जी हाँ सही सुना आपने  “पर्दे के पीछे”
वर्तमान सरकार का वादा सबका साथ सबका विकास नहीं ‘परदे के पीछे’ होना चाहिए था। दरअसल जो आपको दिखाई दे रहा है, असल में वह है नहीं, और जो है वह दिखाया नहीं जा रहा है, “यानी की वास्तविकता कुछ और है लेकिन दिखाया कुछ और ही जा रहा है”। इसमें चाटूकार मीडिया का अहम किरदार है (इसी कड़वी सच्चाई को जो जान लेता है, वह इस सच्चाई को सार्वजनिक करना चाहता है लेकिन कुछ चुनिंदा लोगों द्वारा उस आवाज को या तो दबा दिया जाता है या फिर हमेशा के लिए खामोश कर दिया जाता है।)  इसी बात का में विस्तृत-विश्लेषण करने जा रहा हूं । आप इसको शालीनता से पढ़ें समझे और अपनी राय, प्रतिक्रिया व्यक्त करें ।

भारतीय लोकतंत्र” में  संविधान के अनुसार  समाजवाद  समानता  व सामाजिक सौहार्द का होना बहुत जरूरी है  लेकिन  आधुनिक भारत ( न्यू इंडिया) में  पिछले लगभग 6 सालों से अघोषित आपातकाल जारी है, संविधान को ताक पर रखकर  अंधविश्वास यानी भगवाकरण को सरकारी छूट देना और किसी विशेष समूदाय को अति विशेष सहायता प्रदान करना  इससे यह साबित होता है कि वर्तमान सरकार नहीं चाहती कि भारतीय लोकतंत्र में समाजवाद की स्थापना हो,  सदियों से उपेक्षित  बहुजन ( दलित + मुस्लिम) शोषित पीड़ितों के अधिकारों का हनन किया गया व बहुजन की हर उठती आवाज को दबाया गया, और आज भी वर्तमान सरकार उन पर जबरन बल प्रयोग करके उनको वही उसी स्थिति में पहुंचाने की कोशिश में है । क्या बहुजनों को जीने का अधिकार नहीं ?क्या यह समाजवाद का हिस्सा नहीं ? क्या यह लोकतंत्र का हिस्सा नहीं ? आधुनिक भारत में  आदिवासी समाज ( बहुजन समाज ) स्वतंत्रता पूर्वक आज भी अपनी बात नहीं रख पा रहा है  क्योंकि  गोदी मीडिया सरकार की महिमां मंडन में लीन है बजाऐ इसके की सरकार की वादाखिलाफी व भ्रष्टाचार के विरोध में आवाज उठाऐ।

नोटबंदी, GST, का नाम सुनते हि मन में वही खौफनाक मंजर याद आ जाता है ।यह देश के लिए सबसे ज्यादा हानिकारक रहा । और ना जाने कितने अनगिनत अपराधियों को भाजपा सरकार क्लीन चिट दिला रही है और चुनाव में गुंडे, आतंकवाद के आरोपी भी भाजपा की तरफ से मैदान में हैं। कागजों पर भाजपा सरकार का कार्य बहुत से भी ऊपर अच्छा है लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है

सच्चाई क्या है मैं आपको रूबरु कराता हूँ –

1. सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश ही गिड़गिड़ा रहा है, न्यायिक व्यवस्था बचा लो।
2. सीबीआई चीफ को धक्के देकर निकाल दिया, रोता रहा सीबीआई बचा लो।
3. रिजर्व बैंक का गवर्नर रघुरामन छोड़ के चला गया, उर्जित पटेल इस्तीफा देने को मजबूर हो गया।
4. चुनाव आयोग को पालतू बना देख पूर्व चुनाव आयुक्त तडप रहे हैं।
5. मीडिया सत्ता के पैरों में पड़ा है, सवाल पूछने वाले चैनलों से ही बाहर हो गए।

6. “अंधा कानून” बनाने वाला बालीवुड अब नमो नमो बना रहा है।
7. सवाल पूछने पर देशद्रोह के तगमे मिल रहे हैं
8. आयकर विभाग, ईडी सत्ता का गुंडा बन सिर्फ विपक्ष पर छापे मार रहा है।
9. 45 साल में बेरोजगारी की दर सबसे अधिक हो गई, युवाओं को पकौड़े बेचने की सलाह मिल रही है।
10. जीडीपी दर दो फीसदी कम हो गई, आर्थिक विकास दर पिछले दशक में सबसे कम।

11. किसान खुदकुशी कर रहा है, दूकानें सील हो रही हैं।
12. चोर बैकों से हजारों करोड़ लेकर भाग गए, चौकीदार सोता रहा।
13. सरकारी फाइलें आडिट करने वाली सीएजी ने राफेल  घोटाले पर रिपोर्ट जारी करने से मना कर दिया।
14. सेना में वरिष्ठता को ताक पर रख बनाए गए सेनापप्रमुख राजनीतिक बयान दे रहे हैं।
15. संसद में प्रज्ञा ठाकुर जैसे अपराधी बिठा दीये

72 साल में बनी सारी संस्थाएं बरबाद। अगला निशाना लोकतंत्र और लोगों के वोट का हक। ईवीएम वोट का हक छीनने को तैनात। लिखने को अभी बहुत कुछ है जितना मर्जी लिखूं , अंत में मुझे यही समझ आया के भाजपा का जो नारा है “सबका साथ सबका विकास” यह ना होकर “परदे के पीछे” होना चाहिए ।

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