“भारत में बढती बेरोजगारी”

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भारत में बेरोजगारी बढ़ने का सबसे बड़ा कारण ये है शिक्षा की कमी, अच्छे शिक्षक की भी कमी और गोरमेंट नैकरी में धाधली, इन कारण से बेरोजगारी और बढ़ी है इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन के मुताबीक बेरोजगारी की संख्या २०१७ में भारत में 1 करोड़ 83 लाख लोग बेरोजगार थे. और 2018 में संख्या बढ़कर 1 करोड़ 86 लाख हो गई है

शिक्षा की कमी:-

भारत में शिक्षा की बहुत कमी है जिसके कारण भारत में दिन प्रतदीन बेरोजगारी बढती जा रही है हम आप को बता दे की उत्तर प्रदेश और विहार में सबसे ज्यादा शिक्षा की कमी है जिसके कारण उत्तर प्रदेश और विहार में पिछले कुछ सालो में सबसे ज्यादा बेरोजगारी बड़ी है मै एक दिन स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया की रिपोर्ट देख रही थी उस रिपोर्ट में मैंने ये देखा की उच्च शिक्षा प्राप्त और युवाओं में बेरोजगारी की दर १६% तक पहुंच गई है जिससे देश में और बेरोजगारी बढती जा रही है देश के उत्तरी राज्य – उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी शिक्षा की कमी से प्रभावित हुई हैं

शिक्षक की भी कमी:-

सरकारी स्कूल और कालेज में शिक्षक की बहुत कमी है और जो भी शिक्षक है उसमे से कुछ तो पढ़ाना नहीं चाहते है और कुछ उसके योग्य नहीं है जिसमे प्राथमिक स्कूल में शिक्षक की बहुत कमी है देश भर में उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर शिक्षकों की भी बहुत कमी है राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत एक क्लास में ३० बच्चो पे १ शिक्षक होना चाहिए, लेकिन हमरी शिक्षा प्रणाली इतनी खरब है की हम इस डाटा का रिपोर्ट ही नहीं तैयार किया गया है Centre for Budget and Governance Accountability और Child Rights and You ने एक सर्वे किया जिसमें यह डाटा पता चला की कि 6 राज्यों में 6 लाख से अधिक प्राथमिक स्कूलों के शिक्षक की कमी हैं जिसमे की बिहार और यूपी में 5 लाख से अधिक शिक्षक की कमी हैं. अब आप ही सोचिए इन राज्यों में शिक्षक की कमी के कारण उन बच्चो पे क्या हालत होती होगी और कैसी पढाई होती होगी |

गोरमेंट नैकरी में धाधली:-

आये दिन गोरमेंट नैकरी में धाधली हो रही रही कोई सा भी न्यूज़ पेपर या शिक्षा न्यूज़ वेबसाइट आप देख लीजिये उसमे डेली कोई न कोई नैकरी में धाधली का न्यूज़ मिल ही जायेगा | अभी कुछ रोज मै पहले न्यूज़ वेबसाइट पे पढ़ रही थी उसमे परीक्षा नियामक ही upssc नैकरी के धाधली में गिरफ्तार की गई है ऐसे ही बहुत सारी गोरमेंट नैकरिया है जो किसी न किसी धाधली में फस जा रही रही मैंने ये देखा की शिक्षक से जुडी नैकरी तो सही तरीके से हो ही नहीं सकती जरुर कुछ न कुछ रुकावट होगी ऐसे ही 2011 uptet की शिक्षक नैकरी अभी भी नहीं पूरी हुई है तो आप लोग सोच सकते है की गोरमेंट टीचर बनना कितना मुस्किल होता जा रहा है ऐसा नहीं की पढाई टफ है या उसका एग्जाम है लेकिन ये नैकरी में धाधली के कारण मुश्किले बढ़ जाती है जिससे बेरोजगारी बढती है |

भारत में शिक्षा की बहुत कमी है जिसके कारण भारत में दिन प्रतदीन बेरोजगारी बढती जा रही है हम आप को बता दे की उत्तर प्रदेश और विहार में सबसे ज्यादा शिक्षा की कमी है जिसके कारण उत्तर प्रदेश और विहार में पिछले कुछ सालो में सबसे ज्यादा बेरोजगारी बड़ी है मै एक दिन स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया की रिपोर्ट देख रही थी उस रिपोर्ट में मैंने ये देखा की उच्च शिक्षा प्राप्त और युवाओं में बेरोजगारी की दर १६% तक पहुंच गई है जिससे देश में और बेरोजगारी बढती जा रही है देश के उत्तरी राज्य – उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी शिक्षा की कमी से प्रभावित हुई हैं

भारत में करीब 18 करोड़ लोग बेरोजगार हैं।

भारत में खासकर युवा वर्ग में बढ़ती बेरोजगारी गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में कहा गया है कि देश की आबादी के लगभग 11 फीसदी यानि 12 करोड़ लोगों को नौकरियों की तलाश है, वास्तविकता इन आंकड़ों से मीलों आगे है। (17-18 करोड़) और यह संख्या तेजी से बढती ही जा रही है सरकार का रवैया भी इस विषय पर गंभीर नहीं हैं। यह आँकडे मेरे निजी अध्यन के अनुसार हैं जबकि वास्तविकता इससे भी भयानक होगी।

सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इनमें पढ़े-लिखे युवाओं की तादाद ही सबसे ज्यादा है।  बेरोजगारों में 30 फीसदी 21 से 25 आयुवर्ग के हैं, जबकि 26 से 29 वर्ष की उम्र वाले युवकों की तादाद करीब 24 फीसदी है। लगभग 18 करोड़ युवाओं को नौकरी की तलाश है और इस विषय पर सरकार के कार्य केवल राजनीतिक लाभ हेतु किए गए हैं ना कि वास्तविक, सरकार केवल आंकडे दिखा कर युवाओं को व देश को गुमराह करने में व्यस्त है अगर सरकार ही युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने लगे तो यह संपूर्ण देश पर दोहरी मार है जो कि समस्त देशवासियों को झेलनी पड़ेगी। (जिसमें जीता जागता उदाहरण पिछले साल हुई नोटबंदी है और दोहरी मार जल्दबाजी में लागू की गई जीएसटी की मार है)

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती बेरोजगारी का यह आंकड़ा युवावर्ग के लिए गहरी चिंता का विषय है।”
वर्ष 2017 और वर्ष 2018 में भारत में रोजगार सृजन की गतिविधियों के गति पकड़ने की संभावना नहीं है। इस दौरान धीरे धीरे बेरोजगारी बढ़ी है जबसे नोटबंदी लागू हुई है तभी से रोजगार में कमी आती जा रही है और नोटबंदी कही युवावर्ग के लिए गले की फांस ना बन जाए।

नोटबंदी व जीएसटी – देश में संपूर्ण व्यवसाय, रोजगार, व पहले से प्रगतिशील कार्यों में बाधा ही बनी है जिसके कारण लगभग सभी क्षेत्रों में प्रगति रूक सी गई है और प्रतिशत के संदर्भ में इसमें गतिहीनता दिखाई दे रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘आशंका है कि पिछले साल के बेरोजगारों की तुलना में 2019 में भारत में बेरोजगारों की संख्या में अधिक बृद्धी हुई है और अगले साल इसके आकडें चौका देने वाले हो सकते हैं। 

“लगातार गिरती वैश्विक अर्थव्यवस्था के कारण उत्पन्न क्षति एवं सामाजिक संकट में सुधार लाने और हर साल श्रम बाजार में आने वाले लाखों नवआगंतुकों के लिए गुणवत्तापूर्ण नौकरियों के निर्माण करने में सरकार व युवावर्ग को दोहरी चुनौती का सामना करना पडेगा।

सरकार से मेरा अनुरोध है कि इस विषय पर विशेष ध्यान दिया जाए।

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