“सिंह साहब के विद्यालय से” – Sr. Sobran Singh

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बहुजन समाज पार्टी ही देश में एकमात्र ऐसी पार्टी है जो कभी भी चुनाव-घोषणा-पत्र जारी करने में विश्वास नहीं करती। वह काम में विश्वास रखती है और उसका काम ही बोलता है

संविधान लागू करना ही बहुजन समाज पार्टी का अघोषित घोषणा-पत्र ही है या सामाजिक परिवर्तन एवं आर्थिक मुक्ति। फिर भी एकबार मान्यवर कांशीराम साहब की उपस्थिति में यह घोषणा पत्र जारी किया गया था

बहुजन युवाओं की जानकारी हेतु ========================#सिंह_साहब_के_विद्यालय_से(101)========================आपके लिए जारी है, #बहुजन_समाज_पार्टी का #चुनाव_घोषणा_पत्र। ज्यादातर लोग जानते ही हैं, कि बहुजन समाज पार्टी ही देश में एकमात्र ऐसी पार्टी है जो कभी भी चुनाव-घोषणा-पत्र जारी करने में विश्वास नहीं करती। वह काम में विश्वास रखती है और उसका काम ही बोलता है । जैसे लोग सपा के बाद उसी की तरह ही अब भाजपा की भी लचर कानून व्यवस्था देखकर पुनः बहुजन समाज पार्टी की कानून व्यवस्था को याद कर रहे हैं। वैसे तो संविधान लागू करना ही बहुजन समाज पार्टी का अघोषित घोषणा-पत्र ही है या सामाजिक परिवर्तन एवं आर्थिक मुक्ति। फिर भी एकबार मान्यवर कांशीराम साहब की उपस्थिति में यह घोषणा पत्र जारी किया गया था। तमाम सारे बहुजन युवा इससे अनिभिज्ञ होंगे। उन्हीं की जानकारी के लिए इसे उपलब्ध कराया जा रहा है। ताकि वह इस जानकारी से लाभान्वित हो सकें।

बीएसपी की विचारधारा के बारे में एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश के तहत मनुवादी पार्टियों के लोग अक्सर यह प्रचार करते हैं कि यह पार्टी जातिवादी है, जबकि इसमें कोई सच्चाई नहीं है। वैसे बहुजन समाज को बनाते समय हम जाति-पांति की बातें जरूर करते हैं, परन्तु इसका मतलब यह नहीं कि इस पार्टी को बनाने वाले लोग जातिवाद हैं। सच तो यह है कि इस समाज के लोग ही जातिवाद के शिकार हैं और जो जातिवाद के शिकार हैं, वे जातिवाद नहीं हो सकते हैं।जातिवादी तो वे लोग हैं, जिन्हें जाति के आधार पर फायदा पहुंचा है, मान और सम्मान मिला है, उन्होंने ही इसे टिकाए रखने की हर कोशिश की है तथा अपनी-अपनी पार्टियां बनाई हैं, जिसके माध्यम से इस जातिवाद को नए जमाने के हिसाब से टिकाए रखना चाहते हैं। लेकिन बहुजन समाज के लोग जिनको जातिवाद से नुकसान पहुंचा है, वे तो जातिवाद को समाप्त करना चाहते हैं। जाति की बात तो हम इसलिए करते हैं कि हमें इस असलियत से , जो हमारे सामने है, जिससे हमें नुकसान पहुंचा है, इसे समझना बहुत जरूरी है। यह ध्यान में रखकर हमें इस बीमारी का इलाज कराना है, जिसका मुख्य कारण यह #मनुवाद है और इसी इलाज के लिए यह पार्टी बनाई गई है, तथा इससे स्पष्ट हो गया है कि बीएसपी किसी जाति व धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि #जातिवाद के खिलाफ है।

दूसरा बहुजन समाज पार्टी जब जातिवाद को खत्म करने की बात करती है तो मनुवादी समाज के लोगों को हमारी यह बात अच्छी नहीं लगती है और इतना ही नहीं, फिर ये लोग अपने बुजुर्गों की कमजोरियों को छिपाने के लिए हमारे ऊपर ही यह गलत आरोप लगाते हैं कि बहुजन समाज पार्टी जातिवादी पार्टी है, जिससे देश में जातिवाद को बढ़ावा ही मिलेगा। वैसे इसमें कोई संदेह नहीं है कि जिन बहुजन समाज के लोगों को जाति के आधार पर तोड़ा गया है, उन्हें जाति के आधार पर जोड़ा भी जाएगा।

बाबासाहेब डॉ०अम्बेडकर ने #जाति के आधार पर ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों को उनके सामाजिक और राजनैतिक अधिकार दिलाये। जाति का सहारा लेकर ही इन्होंने सन 1931-32 में राउण्ड टेबल कान्फ्रेंस में इन वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्था करवाई। लेकिन इस मुद्दे पर गाँधी जी के आमरण अनशन के कारण इन वर्गों को पृथक निर्वाचन का अधिकार खोना पड़ा, हालांकि कई लोग हमसे अक्सर यह पूछते हैं कि जिस तरह बाबासाहेब डॉ०अम्बेडकर ने पृथक निर्वाचन के लिए संघर्ष किया, उसी प्रकार आप भी क्यों नहीं शुरू करते? आज तक हमने अपना एक भी मिनट #पृथक_निर्वाचन के मामले पर खराब नहीं किया है। अगर पृथक निर्वाचन का अधिकार बाबासाहेब डॉ०अम्बेडकर द्वारा ब्रिटिश शासन के दौरान भी संभव नहीं हो सका, तो आज यह हमारे लिए किस प्रकार संभव हो सकता है, जबकि देश में मनुवादी समाज के लोगों का राज? आज यह एकदम असंभव है। जाति के विशेषज्ञ बाबासाहेब डॉ०अम्बेडकर ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों को जाति के हथियार का इस्तेमाल करने लायक बनाया था। इसी कारण वे ब्रिटिश हुकूमत से इन वर्गों के लिए कई सुविधाएं जुटाने में सफल रहे।

हमारे अंदर #जातिविहीन समाज का निर्माण करने की भावना हो सकती है, लेकिन इसके साथ यह भी सत्य है कि अभी निकट भविष्य में जाति के विनाश की सम्भावना लगभग नहीं के बराबर है। अब सवाल यह पैदा होता है कि जब तक #जाति का पूरी तरह से विनाश न हो जाये तब तक हमें क्या करना ? इसके बारे में हमारा यह मानना है कि जब तक हम #जातिविहीन समाज की स्थापना करने में सफल नहीं हो जाते, तब तक हमें #जाति का उपयोग करना होगा। अगर #ब्राह्मण जाति का उपयोग अपने फायदे के लिए कर सकते हैं तो क्या हम इसका उपयोग अपने समाज के हित में नहीं कर सकते?

जहाँ तक देश में बहुजन समाज के आर्थिक पहलू का सवाल है यह सवाल भी सीधा इस देश की मनुवादी समाज व्यवस्था से जुड़ा है। यहाँ मनुवादी समाज व्यवस्था के आधार पर जो गैर-बराबरी वाली सामाजिक व्यवस्था बनी है, इसी ही के कारण, यहाँ आर्थिक गैर-बराबरी कायम है। इसलिए बहुजन समाज पार्टी आर्थिक गैर-बराबरी दूर करने के लिए सबसे पहले सामाजिक गैर-बराबरी को दूर करना जरूरी समझती है और हमारा यह पूरा विश्वास है कि जिस दिन इस देश में सामाजिक गैर-बराबरी दूर हो जाएगी, उस दिन आर्थिक गैर-बराबरी काफी हद तक अपने आप ही समाप्त हो जाएगी। इसके लिए हमें ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ेगा।

आज बहुजन समाज की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय है। हमारे समाज के लोग जिन खेतों में मेहनत करके फसल पैदा करते हैं, उन जमीनों पर उनका मालिकाना हक नहीं होता है तथा वे मनुवादी जमींदारों के अन्याय और शोषण का शिकार होते रहते हैं। इस स्थिति से तंग आकर वे अपने गांवों को छोड़कर रोजगार और सम्मानपूर्वक जिंदगी की तलाश में बड़े-बड़े शहरों में आ जाते हैं तथा गंदी-गंदी बस्तियों, पुलों के नीचे , नालों तथा रेल की पटरी के किनारे और अन्य गंदे स्थानों पर जानवरों से भी ज्यादा बुरी जिंदगी जीने के लिए मजबूर हैं। इस डिस्ट्रेश माइग्रेशन ( व्यवस्था से दुःखी होकर पलायन ) के कारण लगभग 10 करोड़ से ज्यादा लोग अपने गांवों को छोड़कर शहरों में आ गए हैं। हम इन्हें

#भारतीय_शरणार्थी कहते हैं। भारत सरकार को इनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए लेकिन दुःख की बात यह है कि हमारे यहाँ सन 1947 में पाकिस्तान से आये शरणार्थियों, जम्मू-कश्मीर से आये शरणार्थियों तथा अन्य स्थानों से आये शरणार्थियों के लिए तो अलग-अलग विभाग तथा मंत्रालयों की व्यवस्था है तथा इन पर करोड़ों-अरबों रुपया खर्च किया जाता रहा है लेकिन अपने ही देश में शरणार्थी बने , इन 10 करोड़ से ज्यादा लोगों की ओर किसी भी सरकार का ध्यान नहीं जाता है, क्योंकि ये लोग अपने देहातों को छोड़कर केवल अपनी #जाति को साथ लेकर शहरों व महानगरों में आकर बस गए हैं। सरकारी नौकरियों में भी इन लोगों के साथ जाति के नाम पर अन्याय होता है और व्यापार के क्षेत्र में तो ये लोग न के बराबर नजर आते हैं। इन सबका मुख्य कारण, इस देश की मनुवादी समाज व्यवस्था है।

जहाँ तक बीएसपी की विचारधारा का सवाल है, इसकी विचारधारा देश व #सर्वसमाज के हित में है। पार्टी इस देश में मनुवादी-व्यवस्था के तहत, जो गैर-बराबरी वाली सामाजिक-व्यवस्था बनी है, उसे बदलकर समतामूलक समाज व्यवस्था बनाना चाहती है। इस व्यवस्था-परिवर्तन में यदि #सवर्ण_समाज में से जो लोग अपनी मनुवादी मानसिकता को छोड़कर, इसमें सहयोग देते, तो ऐसे लोगों का पार्टी में स्वागत किया जाएगा, अर्थात उन्हें बहुजन समाज की तरह, हर मामले में आदर-सम्मान दिया जाएगा।

बीएसपी की जरूरत क्यों पड़ी?~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~अंग्रेजों के भारत छोड़ने के बाद, अभी तक देश में केंद्र व राज्य स्तर पर, जितनी भी सरकारें बनी हैं, उनकी लगाम ज्यादातर मनुवादी पार्टियों के हाथों में रही है, जिन्होंने मनुवादी मानसिकता के तहत बहुजन समाज के लोगों को जिंदगी के हर पहलू में उपेक्षा की है और इनके हित में बनाये गए कानूनों को ईमानदारी व निष्ठा से लागू नहीं किया है अर्थात #मनुविधान के स्थान पर भारतीय संविधान बनने के बाद भी, यहाँ कानूनों में तो सुधार जरूर आया है, लेकिन लागू करने के तौर-तरीकों में कोई ज्यादा सुधार नहीं आया है। यहाँ कानून तो एक है, परन्तु लागू दोहरी मानसिकता के हिसाब से किया जाता है। इसलिए भारतीय संविधान के तहत बहुजन समाज के हित में बनाये गए कानूनों को सही तरीके से लागू करने के लिए बीएसपी की जरूरत महसूस करते हुए, इस पार्टी का गठन किया गया है।बीएसपी राजनीतिक पार्टी के साथ-साथ एक सामाजिक आंदोलन भी है, क्योंकि – 【 राजनीतिक सुधार तथा सामाजिक सुधार एक ही गाड़ी के दो पहियों के समान हैं, जिनमें से एक के बिना दूसरे पहिये पर गाड़ी नहीं चल सकती। दोनों की समान आवश्यकता है। 】【 Political reform and social reform are two wheels of the same vehicle and absence of any one of them would bring the vehicle to a grinding halt . Both are equally needed. 】

बीएसपी का मुख्य लक्ष्य क्या है?~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~देश मे #समाजिक_एवं_आर्थिक परिवर्तन लाना , अर्थात गैर-बराबरी को दूर करना बहुजन समाज पार्टी का मुख्य लक्ष्य है, जिसे राजनीति सत्ता की मास्टर चाबी को हासिल किए बिना प्राप्त नहीं किया जा सकता है। पार्टी के इस लक्ष्य के बारे में, अक्सर मनुवादी पार्टियां चुप रहती हैं, क्योंकि इन्हें यह एहसास हो चुका है कि ऐसा हो जाने से फिर सत्ता बहुजन समाज के हाथों में जरूर आ जायेगी, इसलिए मनुवादी पार्टियां, बहुजन समाज को न्याय देने, समानता व समरसता लाने की बात जरूर करती हैं, परंतु सामाजिक परिवर्तन की बात बिल्कुल नहीं करती हैं, लेकिन इस बारे में बीएसपी का ऐसा मनना है कि यह सब सामाजिक परिवर्तन के बिना सम्भव नहीं हो सकता है, और समाजिक परिवर्तन को लाये बिना समाज में आर्थिक परिवर्तन, अर्थात आर्थिक गैर-बराबरी को दूर नहीं किया जा सकता है।

यहाँ जो सामाजिक एवं आर्थिक गैर-बराबरी बनी हुई है, इसका मुख्य कारण, यहाँ मनुवादी व्यवस्था है, जिसे खत्म करना बहुत जरूरी है , क्योंकि इस व्यवस्था के चलते आज भी हम यह महसूस कर रहे हैं कि जिस प्रकार इस देश में 26 जनवरी सन1950 को नया संविधान लागू होने के बाद, जिस प्रकार राजनैतिक क्षेत्र में बहुजन समाज को बराबरी मिली है, उसी प्रकार सामाजिक एवं आर्थिक क्षेत्र में बराबरी नहीं मिली है। इस बारे में बाबासाहेब डॉ०अम्बेडकर ने कहा था कि – 【 26 जनवरी 1950 को हम दो-तरफी जिंदगी में कदम रखने वाले हैं। एक तरफ राजनीति में सबको बराबरी होगी, अर्थात एक आदमी का एक वोट और एक वोट की एक कीमत होगी । परन्तु दूसरी तरफ सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में, जो गैर-बराबरी मनुवाद के आधार पर वर्षो से चली आ रही है, वह उसी तरह चलती रहेगी । हमारे लिए यह बहुत जरूरी हो जाता है कि इस गैर-बराबरी को हम बहुत जल्द दूर करें। यदि इस दो-तरफी जिंदगी में कदम रखने के बाद, हम दोनों तरफ चलते रहेंगे, तब उससे जो राजनैतिक बराबरी आई है, उस बराबरी का कोई फायदा नहीं होगा। इसलिए देशवासियों को चाहिए कि वे इस देश में राजनैतिक बराबरी की तरह सामाजिक एवं आर्थिक बराबरी भी लाएं। 】

बाबासाहेब डॉ०अम्बेडकर की इन बातों को गंभीरता पूर्वक लेते हुए, बीएसपी इसी दिशा में कार्य कर रही है, और इस कार्य में कुछ हद तक सफलता भी हासिल की है।बीएसपी ने देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तरप्रदेश में कुछ समय के लिए तीन बार राजनीतिक सत्ता की मास्टर चाबी अपने हाथों में लेकर, इस दिशा में बात को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाया है। इसी ही प्रकार का वातावरण, देश के अन्य राज्यों में भी पैदा करना होगा, जिसके लिए लोकसभा व राज्य विधानसभा के चुनाव में अच्छा नतीजा दिखाकर केंद्र व राज्यों की राजनैतिक सत्ता की मास्टर चाबी , बहुजन समाज के लोगों को अपने हाथों में लेनी होगी, तभी पार्टी अपने मुख्य लक्ष्य की प्राप्ति कर सकती।


श्री सोबरन सिंह (आगरा से)
सीनियर बसपा नेता

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